उच्चतम न्यायालय: तरुण तेजपाल रेप केस में गोवा सरकार को नोटिस — पूरा मामला समझिए
25 सितंबर 2026 को उच्चतम न्यायालय ने तरुण तेजपाल की 10 साल की सजा को चुनौती देने वाली याचिका और गोवा सरकार की सजा बढ़ाने वाली याचिका पर नोटिस जारी किए। जानिए 2013 के मामले की पूरी समयरेखा, धाराएं और आगे की प्रक्रिया।
12 Oct 2026, 10:42 UTC

25 सितंबर 2026 को उच्चतम न्यायालय ने 2013 के एक दुष्कर्म मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को मिली 10 साल की सजा से जुड़ी दो याचिकाओं पर नोटिस जारी किए। इसी खबर के चलते Google Trends पर 'उच्चतम न्यायालय' शब्द की सर्च में करीब 1,000% का उछाल दर्ज हुआ — 25 सितंबर को पिछले 24 घंटों में भारत में लगभग 2,000 सर्च। ध्यान रहे, यह आंकड़ा सिर्फ लोगों की सर्च रुचि बताता है; मामले के निष्कर्ष या कानूनी मेरिट की पुष्टि नहीं करता।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ के सामने दो अलग-अलग याचिकाएं रखी गईं। पहली तेजपाल की थी, जिसमें उन्होंने अपनी सजा के खिलाफ अपील की है, और दूसरी गोवा सरकार की, जो सजा बढ़ाकर आजीवन कारावास करवाना चाहती है। ThePrint Hindi की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने तेजपाल की याचिका पर गोवा पुलिस को और राज्य सरकार की याचिका पर तेजपाल को नोटिस भेजा।
तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह एक ऐसा मामला है जहां निचली अदालत की बरी करने वाली कार्रवाई को हाईकोर्ट ने उलट दिया, इसलिए अपील का अधिकार बनता है। उन्होंने जमानत पर सुनवाई का अनुरोध भी किया और बताया कि तेजपाल पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं। गोवा सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दुष्कर्म जैसे अपराध के लिए एक दिन ही काफी है। पीठ ने सुनवाई की तारीख बाद में तय करने की बात कही।
2013 से अब तक: मामले की समयरेखा
- 2013: गोवा में तहलका के एक कार्यक्रम के दौरान होटल की लिफ्ट में कनिष्ठ सहकर्मी से दुष्कर्म का आरोप लगा।
- 2021: अधीनस्थ अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया।
- 6 अगस्त 2026: बॉम्बे हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए तेजपाल को दोषी ठहराया और 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
- 20 अगस्त 2026: तेजपाल ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
- 25 अगस्त 2026: सुप्रीम कोर्ट ने तीन सप्ताह में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया और छूट की गुजारिश खारिज कर दी; इसके बाद तेजपाल ने निचली अदालत में आत्मसमर्पण किया।
- 25 सितंबर 2026: शीर्ष अदालत ने दोनों याचिकाओं पर नोटिस जारी किए।
हाईकोर्ट ने 2021 का फैसला क्यों पलटा?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने 81 पृष्ठ के फैसले में निचली अदालत के 2021 के आदेश को 'विकृत' कहा था। हाईकोर्ट का मानना था कि निचली अदालत इस गलत धारणा से प्रभावित थी कि यौन उत्पीड़न की शिकायत करने वाली महिला को 'आदर्श पीड़िता' की तरह व्यवहार करना चाहिए, तभी वह विश्वसनीय मानी जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष ने जिरह के दौरान पीड़िता के निजी जीवन को निशाना बनाया और अधीनस्थ अदालत ने इस पर आपत्ति नहीं उठाई। यह टिप्पणी भारतीय यौन उत्पीड़न कानून में 'आदर्श पीड़िता' की रूढ़िवादी सोच को खारिज करने की दिशा में एक अहम संकेत मानी जा रही है।
किन धाराओं में दोषी ठहराया गया?
तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) — यानी विश्वास या प्राधिकार की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा दुष्कर्म — के साथ धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) के तहत दोषी करार दिया गया है। धारा 376(2)(एफ) में अधिकतम उम्रकैद का प्रावधान है, इसीलिए गोवा सरकार की दलील है कि अपराध की गंभीरता के मुकाबले 10 साल की सजा काफी कम है।
आगे क्या होगा?
नोटिस जारी होने का अर्थ है कि दोनों पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा, जिसके बाद पीठ सुनवाई की तारीख तय करेगी। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने गोवा सरकार से तेजपाल की अपील पर जवाब मांगा है। अंतिम निर्णय में समय लग सकता है, और तब तक तेजपाल की जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई सबसे अहम होगी।
Sources & further reading
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