राजपाल यादव चेक बाउंस केस: सुप्रीम कोर्ट का अल्टीमेटम और भुगतान योजना
सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस केस में 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। अभिनेता ने 1.15 करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट पेश कर शेष राशि प्रॉपर्टी बेचकर चुकाने का प्रस्ताव दिया है।
19 Oct 2026, 14:32 UTC

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 2 करोड़ का अल्टीमेटम
अक्टूबर 2026 में अभिनेता राजपाल यादव के चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने अभिनेता को सात चेक बाउंस के मामलों में अपनी वित्तीय देनदारी पूरी करने के लिए कड़ी चेतावनी दी। 7 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने राजपाल यादव को 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये जमा करने का अल्टीमेटम दिया। स्रोत 2
यह आदेश दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अभिनेता की याचिका पर तभी विचार करेगा जब वे निर्धारित राशि जमा कर देंगे। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिया कि यदि भुगतान में देरी होती है, तो कोर्ट उनकी सजा बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है।
राजपाल यादव की भुगतान योजना और कोर्ट में भावुकता
अदालत की कड़ी चेतावनी के बाद राजपाल यादव स्वयं कोर्ट रूम में मौजूद रहे और काफी भावुक नजर आए। स्रोत 1 उन्होंने अपनी वित्तीय स्थिति को स्पष्ट करते हुए एक भुगतान योजना पेश की। अभिनेता कोर्ट के सामने 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लेकर पहुंचे और पूरी राशि चुकाने की सहमति व्यक्त की।
शेष 85 लाख रुपये के भुगतान के लिए उन्होंने अपनी एक प्रॉपर्टी बेचने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि प्रॉपर्टी खरीदने वाला व्यक्ति उस समय कोर्ट में ही मौजूद था, जिससे यह संकेत मिला कि वे जल्द से जल्द अपना दायित्व पूरा करना चाहते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि: 'अता पता लापता' और 5 करोड़ का ऋण
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2010 की फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है। राजपाल यादव ने इस फिल्म के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इस लेनदेन के दौरान 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक बाउंस हो गए। समय के साथ ब्याज और अन्य शुल्कों के कारण यह बकाया राशि बढ़ती गई।
अभिनेता ने अपनी सफाई में कहा कि फिल्म ‘अता पता लापता’ में लगभग 200-250 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ था, जिसका असर उन पर भी पड़ा। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी की कि राजपाल की फिल्म की तरह ही उनका पैसा भी 'अता पता लापता' हो गया है, और उन्हें बेहतर फिल्में बनाकर लोगों का मनोरंजन करने की सलाह दी।
कानूनी निहितार्थ और वर्तमान स्थिति
जुलाई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2026 में उन्हें सरेंडर करने से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन यह राहत भुगतान की शर्त पर आधारित थी। यह मामला दर्शाता है कि चेक बाउंस जैसे वित्तीय अपराधों में सेलिब्रिटी स्टेटस कानूनी दंड से बचाव नहीं देता और अदालतें रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए सख्त समयसीमा तय करती हैं।
Sources & further reading
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