फ़सल क्यों ट्रेंड हुई: महाराष्ट्र में सूखे से सोयाबीन बर्बाद, किसानों ने खेतों पर चलाए ट्रैक्टर
25 सितंबर 2026 को 'फ़सल' की सर्च में 700% उछाल की वजह महाराष्ट्र का सूखा है—बीड में किसान ने सूखी सोयाबीन पर ट्रैक्टर चलाया, 20 ज़िले प्रभावित, सरकारी अनुमान में 60% से ज़्यादा नुकसान।
14 Oct 2026, 09:23 UTC

25 सितंबर 2026 को Google Trends India में 'फ़सल' शब्द की सर्च में करीब 700% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और लगभग 2,000 सर्च हुईं। इस उछाल की सबसे बड़ी वजह महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों से आई खबरें थीं, जहां बारिश की कमी से सोयाबीन, मूंग और कपास जैसी खरीफ़ फ़सलें सूख गईं और कुछ किसानों ने बर्बाद फ़सलों पर ट्रैक्टर चला दिए। ध्यान रहे कि Google Trends का आंकड़ा सिर्फ सर्च रुचि दिखाता है, फ़सल की क्षति की गंभीरता नहीं।
बीड में किसान ने सोयाबीन के खेत पर क्यों चलाया ट्रैक्टर?
BBC हिंदी की 24 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, बीड ज़िले के सांडस चिंचोली इलाके के किसान मौली कदम ने 13 सितंबर को अपने 3 एकड़ में लगी सोयाबीन की फ़सल पर ट्रैक्टर चला दिया। उनका कहना था कि बारिश न होने से पूरी फ़सल सूख गई, एक भी फ़ली नहीं लगी और अब उम्मीद भी नहीं बची।
छत्रपति संभाजीनगर के पैठण तालुका के किसान लक्ष्मण गोरे ने बताया कि जून की थोड़ी बारिश के भरोसे उन्होंने बुवाई की, लेकिन मूंग, सोयाबीन और कपास तीनों फ़सलें चली गईं। कुछ किसानों ने बची-खुची फ़सल पशुओं के चारे के लिए छोड़ दी, क्योंकि दाना बनने की कोई संभावना नहीं रही। पैठण के एक किसान के मुताबिक कपास की खेती की लागत 20 से 25 हज़ार रुपये प्रति एकड़ आती है—यानी फ़सल जाने के साथ पूरी पूंजी भी डूब गई।
बारिश के आंकड़े क्या कहते हैं?
राज्य के 20 ज़िलों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है और 86 तालुकों में 30 दिनों से ज़्यादा समय से बारिश नहीं हुई। खरीफ़ सीज़न (1 जून से 16 सितंबर) में मराठवाड़ा में औसतन 33% बारिश की कमी रही—लातूर में 49% और परभणी में 45% की कमी दर्ज की गई।
ThePrint हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के अनुमान में फ़सलों को 60 प्रतिशत से ज़्यादा नुकसान हो सकता है। फ़सलवार अनुमानित गिरावट इस प्रकार है:
| फ़सल | अनुमानित गिरावट |
|---|---|
| सोयाबीन | 80–90% |
| मूंग और उड़द | 80–90% |
| बाजरा, मक्का, तूर | 60–70% |
ये आंकड़े सरकारी रिपोर्ट के अनुमान हैं; अंतिम तस्वीर पंचनामे के बाद ही सामने आएगी।
सरकार की प्रतिक्रिया: पंचनामा और राहत का वादा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 सितंबर को लातूर, सोलापुर और धाराशिव के सूखा प्रभावित तालुकों का दौरा किया। उन्होंने स्वीकार किया कि लातूर और धाराशिव में इस साल सामान्य से 50 प्रतिशत कम बारिश हुई और स्थिति 'बेहद गंभीर' है। उन्होंने फ़सल नुकसान के पंचनामे यानी आकलन शुरू करने का ऐलान किया और अधिकारियों को शनिवार तक राहत का पहला सरकारी आदेश जारी करने का निर्देश दिया। फडणवीस ने यह भी कहा कि केंद्र से फंड आने तक किसानों को इंतज़ार नहीं कराया जाएगा—राज्य अपने खज़ाने से मदद शुरू करेगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अभी तक औपचारिक सूखा घोषणा या मुआवज़े की अंतिम राशि तय नहीं हुई है; पंचनामा प्रक्रिया सिर्फ घोषित हुई है, पूरी नहीं। किसानों की मांग है कि सरकार जल्द सूखा घोषित करे और 50 हज़ार रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद दे।
संकट सिर्फ फ़सल तक सीमित नहीं
आजतक के 'दस्तक' कार्यक्रम ने 24 सितंबर को महाराष्ट्र के सूखे और बिहार की बाढ़—दोनों तरफ़ फंसे किसानों की स्थिति दिखाई। महाराष्ट्र में समस्या फ़सल से आगे बढ़कर पीने के पानी और पशुओं के चारे तक पहुंच गई है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर के पहले हफ़्ते में ही राज्य के 286 गांवों में 307 टैंकरों से पीने का पानी पहुंचाया गया। फडणवीस ने भी चेतावनी दी कि भूजल स्तर और जलाशयों पर बुरा असर पड़ा है और पीने के पानी का संकट आगे गहरा सकता है।
कुल मिलाकर, 'फ़सल' की सर्च में उछाल एक व्यापक कृषि संकट की ओर इशारा करता है—जहां सोयाबीन सबसे ज़्यादा प्रभावित फ़सल है, लेकिन असली परीक्षा सरकार की राहत कार्रवाई की रफ़्तार और पंचनामे के नतीजे तय करेंगे।
Sources & further reading
- सोयाबीन की फ़सल पर किसान ने क्यों चलाया ट्रैक्टर, एक ने कहा- खेत में पांव रखने का भी मन नहीं - BBC News हिंदी
- दस्तक: कहीं सूखे की मार तो कहीं पानी का प्रहार... किसानों को बदहाली से कौन बाहर निकालेगा? - Das Tak AajTak
- ‘किसानों के आंसू पोंछना सरकार का काम’—महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में पहुंचे फडणवीस
- Google Trends India: फ़सल
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