बिहार में आवास योजना धांधली की शिकायतें: रोहतास, सासाराम और औरंगाबाद में क्या हुआ
बिहार के रोहतास, सासाराम और औरंगाबाद में पीएम आवास योजना में कथित उगाही और धांधली की शिकायतों के बीच 'आवास' गूगल ट्रेंड में 700% उछाल के साथ ट्रेंड कर रहा है। जानें आरोप क्या हैं और शिकायत कहां करें।
01 Oct 2026, 16:35 UTC

'आवास' क्यों ट्रेंड कर रहा है?
Google Trends के अनुसार 30 सितंबर 2026 को 'आवास' शब्द भारत में पिछले 24 घंटों में लगभग 2000 सर्च और 700% ग्रोथ के साथ ट्रेंड हुआ। इस उछाल की वजह बिहार के तीन जिलों — रोहतास, सासाराम और औरंगाबाद — से प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में कथित अनियमितता और लाभुकों से राशि उगाही की शिकायतों की खबरें हैं। ध्यान रहे, Google Trends का उछाल केवल सर्च रुचि दर्शाता है; यह आरोपों की सच्चाई का प्रमाण नहीं है।
तीन जिलों में क्या-क्या आरोप लगे?
रोहतास (कोचस): दैनिक भास्कर की 30 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार वार्ड पांच के पार्षद राजा राकेश गुप्ता ने जिलाधिकारी को शिकायत दी है कि 2014 से 2024 के दौरान नगर पंचायत में कमीशन लेकर आवास का लाभ दिलाया गया। शिकायत में आरोप है कि लाभुकों से आवास दिलाने के नाम पर 20,000 से 50,000 रुपये तक वसूले गए और तत्कालीन पार्षद निशा कुमारी ने स्वयं भी योजना का लाभ लिया।
सासाराम (अकोढ़ीगोला): हिन्दुस्तान की 29 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बीडीओ डॉ. रवि रंजन ने समीक्षा बैठक में आवास सहायकों को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों से लाभुकों से पैसे की मांग और पात्र लोगों को जानबूझकर वंचित रखने की शिकायतें मिल रही हैं। बीडीओ ने पारदर्शिता बरतने, अपात्र नाम सूची से हटाने और किसी भी लाभुक से अवैध वसूली न करने के निर्देश दिए।
औरंगाबाद (कुटुंबा): प्रभात खबर की 29 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार विधायक ललन राम ने लाभुकों से कथित उगाही की शिकायत पर जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच कमेटी गठन और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
आरोप और सिद्ध दोष में अंतर समझें
तीनों मामले अभी शिकायत और आरोप के स्तर पर हैं। किसी भी मामले में जांच पूरी होने या किसी के दोष सिद्ध होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही, आरोपित पार्षदों या आवास सहायकों के पक्ष का बयान इन रिपोर्टों में उपलब्ध नहीं है। ये तीनों घटनाएं अलग-अलग जिलों की स्वतंत्र शिकायतें हैं — इन्हें एक ही बड़े घोटाले की तरह नहीं देखना चाहिए।
अगर आपसे भी पैसे मांगे गए हों तो क्या करें?
- प्रखंड कार्यालय में बीडीओ को लिखित आवेदन दें — सासाराम के मामले में लाभुकों ने यही किया और जांच का आश्वासन मिला।
- जिलाधिकारी (DM) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं, जैसा रोहतास और औरंगाबाद में हुआ।
- वसूली का कोई सबूत (रसीद, रिकॉर्डिंग, गवाह) हो तो संरक्षित रखें।
- PMAY-G की लाभुक सूची और किस्त की स्थिति आधिकारिक पोर्टल pmayg.nic.in पर निःशुल्क जांची जा सकती है — योजना का लाभ लेने के लिए किसी को कमीशन देना आवश्यक नहीं है।
जांच की प्रगति और आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि के लिए संबंधित जिला प्रशासन के बयान की प्रतीक्षा है।
Sources & further reading
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