तहसीलदार के घूस मामले: धारवाड़ में ₹50 लाख की रिश्वत, ₹1 करोड़ की मांग और कानूनी कार्रवाई
धारवाड़ के तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर को 17 सितंबर 2026 को ₹50 लाख की रिश्वत लेते पकड़ा गया। यह ₹1 करोड़ और एक एकड़ जमीन की कुल मांग की पहली किस्त थी। जानिए पूरी कहानी और कानूनी कार्रवाई।
21 Sept 2026, 22:19 UTC

क्या हुआ धारवाड़ में?
17 सितंबर 2026 को कर्नाटक के धारवाड़ जिले में लोकायुक्त पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर को ₹50 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। यह राशि कुल मांग की केवल पहली किस्त थी — आरोप है कि तहसीलदार ने कुल ₹1 करोड़ नकद और एक एकड़ जमीन की मांग की थी। यही वजह है कि 'तहसीलदार' और 'घूस' जैसे शब्द Google Trends पर भारत में ट्रेंड कर रहे हैं। AajTak
रिश्वत की मांग किस काम के लिए थी?
बागलकोट के डेवलपर मंजुनाथ अरलीकट्टी ने धारवाड़ तालुक के यारिकोप्पा में करीब 33 एकड़ जमीन खरीदी थी। इस जमीन के RTC (Record of Rights, Tenancy and Crops) रिकॉर्ड में कृषि योग्य और 'खराब' (अनुपजाऊ) हिस्से को अलग-अलग चिह्नित कर सुधार कराना था, साथ ही जमीन का 'पोडी' यानी उप-विभाजन भी कराना था। कर्नाटक के राजस्व प्रशासन में 'पोडी' का अर्थ है किसी बड़े भूखंड को छोटे-छोटे सर्वे नंबरों में बांटने की आधिकारिक प्रक्रिया।
रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में जॉइंट डायरेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स ने पहले के पोडी को रद्द कर नए सिरे से पोडी करने का आदेश दिया था। इसके बाद असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (ADLR) कार्यालय से तहसीलदार को प्रस्ताव भेजा गया। आरोप है कि इसी फाइल को आगे बढ़ाने के बदले तहसीलदार ने रिश्वत की मांग की।
लोकायुक्त ने कैसे बिछाया जाल?
लोकायुक्त एसपी सिद्धलिंगप्पा के अनुसार, शिकायत बुधवार दोपहर को मिली थी और कुछ ही घंटों में टीम ने जाल बिछा दिया। तहसीलदार ने शिकायतकर्ता को KCD ग्राउंड के पास बुलाया था। शिकायतकर्ता लाल रंग के बैग में ₹50 लाख लेकर पहुंचा, और जैसे ही तहसीलदार ने बैग अपने पास रखा, लोकायुक्त टीम ने उसे पकड़ लिया।
कानूनी कार्रवाई और हिरासत
इस मामले में धारवाड़ लोकायुक्त थाने में अपराध संख्या 007/2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (वर्ष 2018 के संशोधन सहित) की धारा 7(ए) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। धारा 7(ए) सार्वजनिक सेवक द्वारा रिश्वत मांगने या स्वीकार करने से जुड़ी है। आरोपी तहसीलदार को लोकायुक्त अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। युगवार्ता
मुख्य तथ्य एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 17 सितंबर 2026 |
| स्थान | KCD ग्राउंड के पास, धारवाड़, कर्नाटक |
| आरोपी | तहसीलदार सच्चिदानंद कुचनूर |
| बरामद राशि | ₹50 लाख (पहली किस्त) |
| कुल मांग | ₹1 करोड़ नकद + एक एकड़ जमीन |
| कानूनी आधार | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 — धारा 7(ए) |
| हिरासत | 14 दिन की न्यायिक हिरासत |
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
यह घटना दिखाती है कि भूमि रिकॉर्ड में सुधार और उप-विभाजन जैसी दिखने में सामान्य प्रक्रियाओं में भी करोड़ों की रिश्वत का खेल हो सकता है। ध्यान देने योग्य है कि बरामद राशि (₹50 लाख) और कुल मांग (₹1 करोड़ + एक एकड़ जमीन) दो अलग बातें हैं — दोनों को एक समझना गलत होगा। लोकायुक्त एसपी ने बताया कि तहसीलदार के अन्य ठिकानों की जांच की जाएगी या नहीं, इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है, और विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
Sources & further reading
- 50 लाख की रिश्वत ले रहा था तहसीलदार, तभी पड़ गई लोकायुक्त की रेड, रंगे हाथ पकड़ा गया - dharwad tehsildar caught accepting rs 50 lakh in lokayukta bribery trap NTC AKTW - AajTak
- 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने वाले धारवाड़ तहसीलदार सच्चिदानंद काे 14 दिन की न्यायिक हिरासत - युगवार्ता
- Google Trends India: तहसीलदार
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