मृत्यू: WHO के अनुसार दुनिया में मौत के 10 सबसे बड़े कारण क्या हैं?
17 सितंबर 2026 को 'मृत्यू' Google India पर ट्रेंड हुआ, लेकिन कोई खबर जुड़ी नहीं। जानिए WHO के 2021 आंकड़ों के अनुसार दुनिया में मौत के 10 सबसे बड़े कारण और भारत जैसे देशों के रुझान।
17 Sept 2026, 03:52 UTC

17 सितंबर 2026 को Google Trends India पर 'मृत्यू' शब्द पिछले 24 घंटों में ट्रेंड करता दिखा, जिसमें करीब 1,000 सर्च दर्ज हुए। इस सर्च स्पाइक से जुड़ी कोई खबर — किसी हादसे, मशहूर हस्ती के निधन या किसी घटना की — उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिली। ऐसे में यह लेख किसी अफवाह को हवा देने के बजाय एक ज़रूरी सवाल का जवाब देता है: दुनिया में मृत्यू के सबसे बड़े कारण असल में क्या हैं? इसका आधार है विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के Global Health Estimates, जिनका नवीनतम संस्करण 2024 में जारी हुआ और जो 2000 से 2021 तक के आंकड़े देता है।
दुनिया में मौत के 10 सबसे बड़े कारण (2021)
WHO के अनुसार 2021 में दुनिया भर में कुल 68 मिलियन मौतें हुईं, जिनमें से 39 मिलियन (57%) सिर्फ शीर्ष 10 कारणों से हुईं [1]। सबसे बड़ा कारण है आइस्केमिक हार्ट डिजीज़ (दिल की बीमारी), जिससे 2021 में 9.1 मिलियन मौतें हुईं — यानी कुल मौतों का 13% [1]। दूसरे स्थान पर COVID-19 रहा, जिससे 8.8 मिलियन मौतें दर्ज हुईं [1]। इसके बाद क्रमशः स्ट्रोक, क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज़ (COPD), निम्न श्वसन संक्रमण, फेफड़ों के कैंसर, अल्जाइमर और अन्य डिमेंशिया, मधुमेह, किडनी रोग और ट्यूबरकुलोसिस शामिल हैं।
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि 2021 में शीर्ष 10 में से 7 कारण गैर‑संचारी रोग (noncommunicable diseases) थे, जो कुल मौतों के 38% के लिए जिम्मेदार थे [1]। वहीं HIV/AIDS और दस्त जैसी बीमारियां, जो 2000 में शीर्ष 10 में थीं, अब इस सूची से बाहर हो चुकी हैं — HIV/AIDS से मौतें 61% घटीं और दस्त से 45% [1]।
भारत जैसे देशों के लिए आंकड़े क्या कहते हैं?
भारत विश्व बैंक के 'लोअर‑मिडिल‑इनकम' समूह में आता है। WHO के अनुसार इस समूह में 2021 में COVID-19 सबसे बड़ा कारण था, जिससे 4 मिलियन से अधिक मौतें हुईं [1]। इस समूह में शीर्ष 10 कारण संतुलित हैं — 5 संचारी और 5 गैर‑संचारी रोग।
दो चिंताजनक रुझान हैं। पहला, मधुमेह से मौतें 2000 के बाद से दोगुनी से अधिक हो गईं और यह 14वें से 8वें सबसे बड़े कारण बन गया [1]। दूसरा, आइस्केमिक हार्ट डिजीज़ से मौतें 2000 के मुकाबले 1.4 मिलियन से अधिक बढ़कर 2021 में 3.2 मिलियन हो गईं [1]। यानी दिल और मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां भारत जैसे देशों में तेज़ी से बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। याद रहे, ये आंकड़े आय‑समूह स्तर के हैं; भारत‑विशिष्ट रैंकिंग इन स्रोतों में उपलब्ध नहीं है।
मृत्यु आंकड़े क्यों मायने रखते हैं?
WHO के अनुसार मौत के कारणों को जानना इसलिए ज़रूरी है ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था की मजबूती का आकलन हो और संसाधन सही जगह लगाए जा सकें [2]। COVID-19 महामारी ने दिखाया कि जिन देशों में नागरिक पंजीकरण और मृत्यु आंकड़ों की व्यवस्था मजबूत थी, वे तेज़ी से प्रतिक्रिया दे पाए। 2021 में वैश्विक औसत जीवन प्रत्याशा 71.3 वर्ष रही [2]。
'मृत्यू' ट्रेंड को लेकर सावधानी
Google Trends पर किसी शब्द का ट्रेंड करना केवल सर्च रुचि दर्शाता है — यह किसी घटना के सच होने का प्रमाण नहीं है। जब तक विश्वसनीय समाचार स्रोत से पुष्टि न हो, किसी निधन या हादसे की अफवाह को सच न मानें और न ही आगे बढ़ाएं।
Sources & further reading
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