ज्ञानेश कुमार इस्तीफा विवाद: SIR, सुप्रीम कोर्ट याचिका और विपक्षी प्रदर्शनों की पूरी कहानी
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर 28 सितंबर 2026 को देशभर में प्रदर्शन हुए। जानिए SIR विवाद, दो आयुक्तों की आपत्तियां, सुप्रीम कोर्ट की क्वो वारंटो याचिका और BJP के जवाब की पूरी कहानी।
13 Oct 2026, 15:47 UTC

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इन दिनों सियासी घमासान के केंद्र में हैं। 28 सितंबर 2026 को दिल्ली, पटना, जयपुर, हैदराबाद, श्रीनगर और कोलकाता जैसे शहरों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, CPI तथा सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग सड़कों पर उतरे और उनसे पद छोड़ने की मांग की। जयपुर में पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन तक चलाना पड़ा। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच चुका है, जहां एक याचिका में उन्हें निलंबित करने की अपील की गई है। आइए समझते हैं कि यह विवाद क्यों भड़का और दोनों पक्ष क्या कह रहे हैं।
विवाद की जड़: खोजी रिपोर्ट और आयोग के भीतर की आपत्तियां
इस बवाल की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट से हुई। बीबीसी हिंदी की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बीते दस महीनों के दौरान आयोग के फैसलों पर कुल 14 बार आपत्ति दर्ज कराई और कहा कि बड़े निर्णयों में उनकी भागीदारी नहीं थी।
चुनाव आयोग ने जवाब में प्रेस नोट निकालकर स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) सहित पिछले एक वर्ष के सभी अंतिम निर्णय पूरी सहमति से लिए गए। यानी टकराव साफ है — एक तरफ आयोग के अंदर से आपत्तियों का दावा, दूसरी तरफ 'सर्वसम्मति' का आधिकारिक बचाव।
SIR विवाद क्या है?
SIR यानी Special Intensive Revision — मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा — इस पूरे विवाद का केंद्र है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसे पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है, जबकि पी. चिदंबरम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से 13.30 करोड़ नाम काट दिए गए। ध्यान रहे, यह आंकड़ा कांग्रेस का दावा है और स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।
ABP की 29 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी एस. चोकलिंगम ने भी आयोग को पत्र भेजकर SIR के नोटिस चरण में ECINet सॉफ्टवेयर में बदलाव और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) को अधिक अधिकार देने की मांग रखी है — यही मांग पहले दोनों चुनाव आयुक्त भी उठा चुके थे।
सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है?
राकेश कुमार सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में 'क्वो वारंटो' रिट मांगी गई है। इसमें सवाल उठाया गया है कि ज्ञानेश कुमार ने किस अधिकार के तहत अन्य आयुक्तों की मंजूरी के बिना अकेले फैसले लिए, जबकि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग के निर्णय सामूहिक या बहुमत के आधार पर होने चाहिए। याचिका में निलंबन और फैसलों पर रोक की मांग है, लेकिन अभी तक कोर्ट की ओर से कोई आदेश नहीं आया है — यानी ये मांगें फिलहाल आरोप और अपील के स्तर पर ही हैं।
BJP का बचाव और विपक्ष की रणनीति
BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने आरोपों को 'हताशा और निराशा' बताया और कहा कि कांग्रेस जहां चुनाव जीतती है वहां चुनाव आयोग दोषी नहीं होता, लेकिन हारने पर आयोग पर सवाल उठाती है। JD(U) प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी यही तर्क दोहराया।
विपक्षी मोर्चे पर आज तक की 28 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक सबकी नजरें 30 सितंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक पर टिकी थीं, क्योंकि इस मुद्दे पर अभी तक विपक्ष की कोई साझा जमीनी रणनीति सामने नहीं आई थी। इस बीच मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियों ने 4 अक्टूबर को चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त मोर्चा निकालने का ऐलान किया है।
आगे क्या देखें?
- सुप्रीम कोर्ट में क्वो वारंटो याचिका पर सुनवाई का नतीजा और कोई अंतरिम आदेश आता है या नहीं।
- INDIA गठबंधन की बैठक से कोई साझा रणनीति निकलती है या नहीं।
- 4 अक्टूबर का मुंबई मोर्चा और प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन का असर।
- चुनाव आयोग के प्रेस नोट और दोनों आयुक्तों की आपत्तियों पर आगे कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण।
फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ विपक्ष और सिविल सोसाइटी इस्तीफे और गिरफ्तारी तक की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष सभी फैसलों को सर्वसम्मत और कानूनी बता रहे हैं। अंतिम शब्द अब संभवतः सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से आएगा।
Sources & further reading
- ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा - BBC News हिंदी
- CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आक्रामक विपक्ष का कई प्लान, BJP बोली- भ्रम न फैलाएं
- EC के खिलाफ क्या एकजुट हो पाएगा विपक्ष? 30 सितंबर की बैठक पर टिकी नजरें - Politics AajTak
- Google Trends India: ज्ञानेश कुमार
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