आतंकवाद में महिलाओं की बदलती भूमिका: आत्मघाती हमलों से कमान तक का सफर
जिहादी संगठनों में महिलाएं अब केवल आत्मघाती हमलावर नहीं रहीं, बल्कि वे प्रशिक्षक, भर्ती एजेंट और कमांडर के रूप में कमान संभाल रही हैं, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए नई चुनौती है।
06 Oct 2026, 11:19 UTC

हाल के दिनों में आतंकवाद से जुड़ी खोजों में 500% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह रुझान मुख्य रूप से इस खबर से प्रेरित है कि जिहादी संगठनों के भीतर महिलाओं की भूमिका अब केवल 'मोहरे' के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक नेतृत्व और संचालन तक फैल गई है।
रणनीतिक बदलाव: हमलावर से प्रशिक्षक तक
जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सारा हरमूश के विश्लेषण के अनुसार, जिहादी समूहों में महिलाओं के अधिकारों को अब औपचारिक रूप दिया जा रहा है। पहले महिलाओं का उपयोग मुख्य रूप से इसलिए किया जाता था क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां उन्हें कम खतरा मानती थीं, जिससे वे आसानी से लक्ष्यों तक पहुँच सकती थीं। हालांकि, अब वे संगठन के भीतर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वैचारिक पदों पर आसीन हो रही हैं।
वर्तमान में महिलाएं इन प्रमुख क्षेत्रों में सक्रिय हैं:
- नए सदस्यों की भर्ती और उनका वैचारिक प्रशिक्षण देना।
- संगठन के भीतर नियमों को लागू करना और अनुशासन बनाए रखना।
- परिचालन संबंधी कार्यों का प्रबंधन और रणनीतिक दिशा तय करना।
खदरा ईसा और अमेरिकी इनाम का मामला
इस बदलते स्वरूप का एक ज्वलंत उदाहरण खदरा ईसा है, जो सोमालिया में जन्मी एक डच नागरिक है। ThePrint की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने 14 सितंबर 2026 को उसकी जानकारी देने वाले के लिए 50 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा को फिर से सार्वजनिक किया है।
ईसा को आईएसआईएस-एनके की एक प्रमुख शरिया प्रशिक्षक माना जाता है। उसने 2016 में सीरिया के रक्का में महिलाओं की एक लड़ाकू बटालियन के गठन और प्रशिक्षण में मुख्य भूमिका निभाई। उस पर आरोप है कि उसने न केवल हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण दिया, बल्कि ऐसी चरमपंथी विचारधारा का प्रसार भी किया जो नागरिकों की हत्या को सही ठहराती है।
ऐतिहासिक तुलना: तब और अब
महिलाओं की आतंकी गतिविधियों में भागीदारी का इतिहास रहा है, लेकिन उसके स्वरूप में बड़ा अंतर आया है। नीचे दी गई तालिका इस बदलाव को स्पष्ट करती है:
| काल/संगठन | प्राथमिक भूमिका | प्रमुख उदाहरण/तथ्य |
|---|---|---|
| 1980-90 के दशक (SSNP, LTTE, PKK) | आत्मघाती हमलावर | 1991 में धनु द्वारा पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या। |
| 2011-2017 (बोको हराम) | व्यापक स्तर पर हमले | 238 हमलों में लगभग 56% हमलावर महिलाएं थीं। |
| 2014 के बाद (ISIS) | संगठनात्मक नेतृत्व | सीरिया में 'अल-खंसा ब्रिगेड' का गठन। |
सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती
यह बदलाव आतंकवाद-रोधी रणनीतियों के लिए एक जटिल चुनौती पेश करता है। जब महिलाएं नेतृत्व, भर्ती और प्रशिक्षण जैसे पदों पर आती हैं, तो संगठन की वैचारिक पहुँच और लचीलापन बढ़ जाता है। यह केवल शारीरिक हमलों तक सीमित न रहकर एक दीर्घकालिक संगठनात्मक ढांचे में तब्दील हो रहा है, जिसे पहचानना और नष्ट करना अधिक कठिन होता है।
Sources & further reading
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