रूस में लैब तकनीशियन की मौत के बाद भारत में 'प्लेग' क्यों ट्रेंड कर रहा है?
रूस के साइबेरिया लैब में एक तकनीशियन की मौत और डोनाल्ड ट्रंप के बायोवेपन संबंधी बयानों के कारण भारत में 'प्लेग' शब्द ट्रेंड कर रहा है। जानें पूरी सच्चाई और स्वास्थ्य जोखिम।
11 Oct 2026, 01:58 UTC

भारत में 'प्लेग' शब्द की सर्च में अचानक उछाल
अक्टूबर 2026 के पहले सप्ताह में भारतीय यूजर्स के बीच गूगल पर 'प्लेग' शब्द की खोज में अचानक 75% की वृद्धि देखी गई। यह ट्रेंड रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुई एक दुखद घटना और उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया के कारण बढ़ा है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह किसी वैश्विक स्वास्थ्य संकट या जैविक हथियार (bioweapon) का संकेत है।
साइबेरिया लैब घटना: क्या हुआ था?
रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र में स्थित 'एंटी-प्लेग इंस्टीट्यूट ऑफ साइबेरिया एंड द फार ईस्ट' में काम करने वाली एक 28 वर्षीय महिला लैब तकनीशियन की 2 अक्टूबर 2026 को मृत्यु हो गई। रूसी अधिकारियों और इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोब्ज़ेव ने मौत का प्राथमिक कारण "अज्ञात कारणों से हुआ न्यूमोनिया" बताया है।
इस घटना ने तब तूल पकड़ा जब यह खबर आई कि मृत महिला ने हाल ही में मंगोलिया की सीमा से लगे बुर्यातिया क्षेत्र का दौरा किया था, जहाँ प्लेग के जीवाणु प्राकृतिक रूप से चूहों में पाए जाते हैं। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि लैब में काम के दौरान एक टेस्ट ट्यूब टूटने से वह संक्रमित हुई होगी, हालांकि रूसी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। एहतियात के तौर पर, मृत महिला के संपर्क में आए लगभग 200 लोगों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है, लेकिन अब तक किसी अन्य व्यक्ति में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है।
डोनाल्ड ट्रंप का बयान और बायोवेपन की आशंका
इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया, खासकर जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन इस मामले पर "बहुत गंभीरता से" नज़र रख रहा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह किसी बायोवेपन (जैविक हथियार) का मामला है, तो ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसा नहीं लगता, लेकिन उन्होंने कहा, "हम जल्द ही इसका पता लगा लेंगे."
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी इस बात की पुष्टि की कि अमेरिका स्थिति की निगरानी कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि न्यूमोनिक प्लेग जैसा कोई संक्रमण लैब से बाहर न फैले। वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन दावों को अफवाह बताया है और लोगों से आधिकारिक स्वास्थ्य संस्थाओं के बयानों पर भरोसा करने की अपील की है।
प्लेग क्या है और क्या यह खतरनाक है?
प्लेग एक बैक्टीरियल बीमारी है जो 'येर्सिनिया पेस्टिस' (Yersinia pestis) नामक बैक्टीरिया से फैलती है। यह मुख्य रूप से दो रूपों में देखा जाता है:
- ब्यूबोनिक प्लेग: यह सबसे आम रूप है जो आमतौर पर संक्रमित पिस्सुओं के काटने से फैलता है।
- न्यूमोनिक प्लेग: यह सबसे खतरनाक रूप है क्योंकि यह सीधे फेफड़ों पर हमला करता है और संक्रमित व्यक्ति की सांसों के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि न्यूमोनिक प्लेग बिना इलाज के जानलेवा हो सकता है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा में इसे प्रभावी एंटीबायोटिक्स के जरिए पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। वर्तमान में, इस घटना के बाद प्रयोगशाला के बाहर किसी भी सार्वजनिक प्रकोप की कोई रिपोर्ट नहीं है, इसलिए आम जनता के लिए जोखिम बहुत कम है।
Sources & further reading
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