जयंत चौधरी: एनडीए कोटे से राज्यसभा की चर्चा क्यों तेज हुई, क्या है पूरा गणित
जयंत चौधरी एनडीए कोटे से राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा के कारण ट्रेंड कर रहे हैं। जानिए इस्तीफे की शर्त, रालोद को दो सीटों का गणित और 2027 यूपी चुनाव से जुड़ाव।
13 Oct 2026, 10:36 UTC

जयंत चौधरी क्यों ट्रेंड कर रहे हैं?
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी का नाम अक्टूबर 2026 की शुरुआत में भारत में तेजी से खोजा जा रहा है। Google Trends के अनुसार 3 अक्टूबर 2026 के आसपास 'जयंत चौधरी' के लिए लगभग 20,000 खोजें दर्ज की गईं और ग्रोथ करीब 1000% रही। इसका कारण यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले चुनाव से पहले की गई मीडिया रिपोर्ट्स हैं, जिनमें कहा गया है कि भाजपा उन्हें एनडीए के कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार कर रही है।
वर्तमान स्थिति क्या है?
जयंत चौधरी फिलहाल उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। वे जून 2022 में समाजवादी पार्टी और रालोद के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे, जब रालोद के पास सिर्फ नौ विधायक थे और सपा ने अपने कोटे से उन्हें भेजा था। नवभारत टाइम्स और अमर उजाला दोनों की 2 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार उनका मौजूदा कार्यकाल 5 जुलाई 2022 से शुरू होकर 2028 तक का है।
इस्तीफा और दो सीटों का गणित
रिपोर्ट्स के अनुसार अगर भाजपा जयंत को एनडीए कोटे से दोबारा राज्यसभा भेजती है, तो यह सामान्य पुनर्निर्वाचन नहीं होगा। उन्हें पहले अपनी मौजूदा सीट से इस्तीफा देना होगा, जिसके बाद शेष अवधि के लिए उस सीट पर उपचुनाव होगा। नवभारत टाइम्स ने रालोद के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी के हवाले से लिखा है कि इससे रालोद को दो सीटें मिल सकती हैं — एक नई एनडीए कोटे वाली और दूसरी इस्तीफे से खाली होने वाली सीट, जिसका उपचुनाव में शेष कार्यकाल रालोद के किसी नेता को दिया जा सकता है।
राजनीतिक फायदे और 2027 का कनेक्शन
सियासी जानकारों के अनुसार इस कदम के कई माने निकाले जा रहे हैं। पहला, 2028 में कार्यकाल खत्म होने के बाद जयंत के मंत्रिमंडल में बने रहने का संशय टल जाएगा। दूसरा, सपा का वह हमला खत्म होगा कि महज आठ-नौ विधायक होते हुए भी उसने जयंत को राज्यसभा भेजा था — यानी अखिलेश यादव के 'एहसान का बोझ' उतर जाएगा। तीसरा, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की जाट राजनीति में रालोद-भाजपा दोस्ती को मजबूत करने का संदेश जाएगा। रिपोर्ट्स में यह भी चर्चा है कि 2029 में बागपत लोकसभा सीट से जयंत अपनी पत्नी चारू को मैदान में उतार सकते हैं।
क्या है पुष्टि की स्थिति?
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला अभी पार्टी सूत्रों और सियासी चर्चा के स्तर पर है। अमर उजाला के अनुसार रालोद नेता खुलकर बोलने से बच रहे हैं और अंतिम फैसला जयंत के विदेश से लौटने के बाद हो सकता है। भाजपा, रालोद या चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए 16 अक्टूबर के चुनाव से पहले स्थिति बदल सकती है।
Sources & further reading
- अखिलेश यादव के एहसान का बोझ उतारेंगे जयंत चौधरी, चारू के लिए भी प्लान तैयार, एक इस्तीफे से मिलेंगे 3 फायदे - jayant chaudhary may go to rajya sabha under nda quota after resigning - Navbharat Times
- सियासत:जयंत को एनडीए के कोटे से राज्यसभा भेजने की तैयारी, विधानसभा चुनाव में सपा के मुद्दे को रोकने की रणनीति - Preparation To Send Jayant Chaudhary To Rajya Sabha From Nda Quota, Amid Political Debate Ahead Of Up Polls - Amar Ujala Hindi N
- Google Trends India: जयंत चौधरी
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