हरदीप सिंह पुरी और CNPC चेयरमैन की मुलाकात: भारत-चीन ऊर्जा सुरक्षा पर नया रणनीतिक तालमेल
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने CNPC चेयरमैन से मुलाकात कर तेल, गैस और हरित ऊर्जा में सहयोग पर चर्चा की। जानिए कैसे पश्चिम एशिया संकट और BRICS ने भारत-चीन को करीब लाया।
21 Sept 2026, 19:19 UTC

भारत और चीन, जो वर्तमान में दुनिया के दो सबसे बड़े कच्चे तेल आयातक हैं, अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। 14 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने चीन की सरकारी तेल कंपनी, चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CNPC) के चेयरमैन दाई होउलियांग के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य तेल, गैस और भविष्य की हरित ऊर्जा प्रणालियों में द्विपक्षीय सहयोग को विस्तार देना था।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र और कार्यान्वयन
यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें ऊर्जा क्षेत्र के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने निम्नलिखित प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया है:
- पारंपरिक ऊर्जा: तेल और गैस के क्षेत्र में आपसी समन्वय और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना।
- नवीकरणीय ऊर्जा: नई ऊर्जा (New Energy) के स्रोतों का विकास करना ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
- पर्यावरण लक्ष्य: कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास मॉडल और हरित ऊर्जा तकनीकों को साझा करना।
इस चर्चा की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैठक में भारत की ओर से केवल मंत्रालय के अधिकारी ही नहीं, बल्कि तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL) के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद थे, जो भविष्य के व्यावसायिक समझौतों की संभावना को दर्शाता है।
रणनीतिक चालक: पश्चिम एशिया की अस्थिरता और BRICS
इस अचानक बढ़ी ऊर्जा कूटनीति के पीछे दो बड़े वैश्विक कारण हैं। पहला, पश्चिम एशिया में गहराता संकट है, जहाँ हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर किए गए हमलों ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। ऐसे में भारत और चीन दोनों के लिए आपूर्ति का वैकल्पिक और स्थिर मार्ग खोजना अनिवार्य हो गया है।
दूसरा महत्वपूर्ण कारण 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का प्रभाव है। इस सम्मेलन के दौरान अपनाए गए संयुक्त घोषणा-पत्र में ऊर्जा सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास की बुनियादी शर्त माना गया है। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को हुई मुलाकात के बाद एक कार्यात्मक कदम के रूप में आयोजित की गई थी।
निष्कर्ष: कूटनीतिक तनाव और ऊर्जा व्यावहारिकता
विशेषज्ञों के अनुसार, हरदीप सिंह पुरी और दाई होउलियांग की यह मुलाकात 'ऊर्जा व्यावहारिकता' का उदाहरण है। यह दर्शाता है कि भले ही सीमा विवाद और राजनीतिक तनाव जारी रहें, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा जैसे अस्तित्वगत मुद्दे दोनों देशों को संवाद के लिए मजबूर करते हैं। यह सहयोग वैश्विक ऊर्जा प्रशासन में दोनों देशों के प्रभाव को बढ़ाने और बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने की एक साझा कोशिश है।
Sources & further reading
- BRICS के खत्म होते ही कच्चे तेल पर भारत-चीन की बड़ी तैयारी, हरदीप पुरी से मिले पेट्रोलियम कंपनी के चीनी अधिकारी - india china boost energy ties puri meets cnpc chief
- चीन की पेट्रोलियम कंपनी के प्रमुख की हरदीप पुरी से मुलाकात, ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा – ThePrint Hindi
- भारत-चीन के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा:हरदीप पुरी से मिले चीन की तेल कंपनी के प्रमुख, हुई क्या बात? - India-china-deepen-energy-cooperation-hardeep-puri-cnpc-chairman-meeting - Amar Ujala Hindi News Live
- Google Trends India: हरदीप सिंह पुरी
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