अनिल अंबानी पर CBI की FIR: ₹2,684.57 करोड़ के LIC फ्रॉड मामले की पूरी जानकारी
CBI ने अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल के खिलाफ ₹2,684.57 करोड़ के LIC फ्रॉड मामले में FIR दर्ज की है। जानें क्या हैं आरोप और अंबानी के प्रवक्ता का जवाब।
17 Oct 2026, 13:43 UTC

CBI ने अनिल अंबानी और रिलायंस कैपिटल के खिलाफ मामला दर्ज किया
18 सितंबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (RCL), इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी, और पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। यह कानूनी कार्रवाई भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के साथ हुई कथित धोखाधड़ी से जुड़ी है, जिसमें LIC को भारी वित्तीय नुकसान होने का दावा किया गया है।
क्या है LIC फ्रॉड का पूरा मामला?
CBI की जांच के अनुसार, यह मामला 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच की अवधि का है। इस दौरान LIC ने रिलायंस कैपिटल द्वारा जारी पांच गैर-परिवर्तनीय ऋण पत्र (Non-Convertible Debentures - NCDs) खरीदे थे। इन निवेशों की कुल कीमत ₹3,900 करोड़ थी।
LIC का आरोप है कि यह राशि कंपनी की सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों, फंडिंग की आवश्यकताओं और पुराने ऋणों के पुनर्वित्त (refinancing) के लिए दी गई थी। हालांकि, जांच एजेंसी का दावा है कि इस राशि का उपयोग तय उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया। इसके बजाय, इस फंड को समूह की उन अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया जो पहले से ही घाटे में चल रही थीं। जब रिलायंस कैपिटल वित्तीय संकट में फंस गई, तो वह LIC के कर्ज का भुगतान करने में असमर्थ रही, जिसके परिणामस्वरूप LIC को ₹2,684.57 करोड़ का शुद्ध नुकसान हुआ (source 1)।
अनिल अंबानी और उनके प्रवक्ता का पक्ष
इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद, अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। प्रवक्ता का तर्क है कि यह मामला पूरी तरह से रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के संचालन से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी वर्ष 2005 से नवंबर 2021 तक कंपनी में केवल एक गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) और बोर्ड के चेयरमैन की भूमिका में थे।
प्रवक्ता ने यह भी उल्लेख किया कि नवंबर 2021 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कंपनी के बोर्ड को हटाकर एक प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया था, जिससे अंबानी का सीधा नियंत्रण समाप्त हो गया था (source 2)। उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी कानून के तहत अपने सभी अधिकारों को सुरक्षित रखते हैं।
निवेशकों और बाजार के लिए इसके मायने
यह मामला रिलायंस कैपिटल के लिए एक कठिन समय में आया है, जो पहले से ही RBI की सख्त निगरानी और ऋण पुनर्गठन (debt restructuring) की प्रक्रियाओं से गुजर रहा है। हालांकि यह FIR अभी जांच का शुरुआती चरण है और अदालत में किसी दोषसिद्धि (conviction) का प्रमाण नहीं है, लेकिन यह सरकारी संस्थानों द्वारा कॉर्पोरेट गवर्नेंस और फंड डायवर्जन की कड़ी निगरानी को दर्शाता है। LIC जैसे बड़े संस्थान का नुकसान सार्वजनिक धन और बीमाधारकों के हितों से जुड़ा होता है, इसलिए इस मामले की जांच का व्यापक असर पड़ सकता है।
Sources & further reading
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