सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया: 9 अक्तूबर 2026 की सुनवाई में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट और एफआईआर पर क्या तय हुआ
9 अक्तूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी प्रोटेस्ट से जुड़े एफआईआर रद्दीकरण पर रिव्यू अर्ज खारिज किया, जबकि जंतर-मंतर को लेकर सीजेआई सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी और दिल्ली पुलिस के इनकार ने सवाल खड़े किए।
15 Oct 2026, 19:57 UTC

9 अक्तूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया गूगल ट्रेंड्स इंडिया की ट्रेंडिंग सूची में आया। उस दिन के पास्ट-24-घंटे डेटा में इस शब्द की खोज में करीब 300% की बढ़त और लगभग 5,000 अनुमानित खोजें दर्ज हुईं। यह रुचि दो जुड़ी हुई घटनाओं से बनी — सीजेपी के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से जुड़े एफआईआर रद्द किए जाने के मामले में दायर रिव्यू अर्ज की खारिजगी, और उसी दिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल मानने पर मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत की मौखिक टिप्पणी। ध्यान रहे, Google Trends का यह आंकड़ा केवल खोज रुचि बताता है; यह किसी खबर की सच्चाई या किसी वेबसाइट के ट्रैफिक का प्रमाण नहीं है।
एफआईआर पर रिव्यू अर्ज खारिज: क्या कहा कोर्ट ने
मुख्य न्यायमूर्ति सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने एल रमानाथन की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान दर्ज एफआईआर की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी। पीठ ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि इसमें उठाई गई मांगें दरअसल मुकदमे रद्द करने के अपने पहले के आदेश को ही चुनौती देती हैं। LiveHindustan की 9 अक्तूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह याचिका एफआईआर रद्द होने के फैसले से पहले ही दायर कर दी गई थी।
पीठ ने यह भी बताया कि मुकदमे हटाने के लिए अनुच्छेद 142 की शक्ति का इस्तेमाल करते समय परिस्थितियों और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखा गया। सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि ये युवा छात्र हैं, उनके माता-पिता और उनके भविष्य को देखना जरूरी है, और यह नहीं चाहिए कि उन्हें बार-बार अदालतों के चक्कर लगाने पड़ें।
पृष्ठभूमि नीट पेपर लीक से जुड़ी है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी ने जंतर-मंतर पर धरना दिया और 20 जुलाई 2026 को संसद चलो मार्च निकाला। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के टकराव के बाद दिल्ली पुलिस ने 12 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की थीं, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।
जंतर-मंतर पर सीजेआई की चिंता और सरकार का रुख
उसी दिन एक संबंधित सुनवाई में सीजेआई ने कहा कि प्रदर्शन स्थल के तौर पर जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और उसका छोटा आकार, दोनों ही दिक्कत पैदा करते हैं, इसलिए कोई वैकल्पिक जगह सोची जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्थान की कमी से प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं — भोजन, सैनिटेशन और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाओं में दिक्कत आती है। ABP Live ने इस टिप्पणी को इस सवाल के साथ कवर किया कि क्या जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि शांतिपूर्ण और वैध प्रदर्शन के लिए जरूरी सुविधाओं वाली किसी वैकल्पिक जगह की पहचान पर विचार किया जा सकता है। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि वह इस प्रस्ताव पर विचार कर उपयुक्त स्थान तय करने पर उचित निर्णय ले।
दिल्ली पुलिस का इनकार और मेट्रो-ट्रेन पर निर्देश
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के 10 अक्तूबर 2026 के जंतर-मंतर प्रदर्शन को इजाजत देने से इनकार कर दिया। इस प्रदर्शन की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी। जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (नई दिल्ली रेंज) नूपुर प्रसाद के मुताबिक, सीजेपी सह-संयोजक सौरव दास का आवेदन बहुत कम समय पहले मिला था, जबकि नियम के अनुसार प्रदर्शन की योजना से 10 दिन पहले सूचना देनी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इजाजत मिलने पर पार्टी ने तय शर्तों का पालन नहीं किया था।
इसी मामले की सुनवाई में कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली में मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की जाएं। जस्टिस बागची ने कहा कि सड़क मार्ग पर भी परिवहन उपलब्ध रहना चाहिए और इन सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं किया जा सकता।
क्या अदालती आदेश है, क्या मौखिक टिप्पणी
इस पूरे घटनाक्रम को पढ़ते समय तीन बातें अलग-अलग रखनी जरूरी हैं, क्योंकि इनका असर और कानूनी वजन अलग है।
| बिंदु | 9-10 अक्तूबर 2026 में क्या हुआ |
|---|---|
| एफआईआर मामला | रिव्यू अर्ज खारिज; मुकदमों की योग्यता पर नया फैसला नहीं |
| जंतर-मंतर | सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी; प्रदर्शन पर रोक का अंतिम आदेश नहीं |
| 10 अक्तूबर प्रोटेस्ट | दिल्ली पुलिस ने इजाजत नहीं दी; यह प्रशासनिक फैसला है |
| मेट्रो और ट्रेन | कोर्ट का निर्देश — सेवाएं पूरी तरह बंद न करें |
यानी एफआईआर से जुड़ा फैसला रिव्यू याचिका को खारिज करने का है, नीट प्रोटेस्ट के मुकदमों पर नए सिरे से सुनवाई का नहीं। जंतर-मंतर पर सीजेआई की बातें सुनवाई के दौरान की गई मौखिक अभिव्यक्ति थीं, न कि साइट पर प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई अंतिम आदेश। और दिल्ली पुलिस का इनकार 10 अक्तूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए था, जो एक अलग प्रशासनिक निर्णय है।
इन बारीकियों को समझने की जरूरत इसलिए भी है कि गूगल ट्रेंड्स पर दर्ज 300% वृद्धि और करीब 5,000 खोजें सिर्फ यह बताती हैं कि लोग जवाब ढूंढ रहे थे। यह संख्या न खबरों की पुष्टि करती है, न किसी दावे का सबूत है।
Sources & further reading
- ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट से पहले कॉकरोच जनता पार्टी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत, Ncr Hindi News - Hindustan
- क्या जंतर-मंतर अब नहीं रहेगा प्रोटेस्ट साइट? SC की टिप्पणी के बाद उठे सवाल | CJP Protest Will Jantar Mantar no longer be a protest site supreme court directions
- Google Trends India: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
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