308 पहियों वाला ट्रक: बेल्जियम से यूपी तक 200 टन भारी मशीन की यात्रा
308 पहियों वाला एक विशाल हाइड्रॉलिक ट्रांसपोर्टर 200 टन वजनी मशीन लेकर यूपी पहुंचा। यह मशीन भारत के पहले गन्ना-आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक प्लांट के लिए बेल्जियम से लाई गई है।
18 Oct 2026, 20:32 UTC

सितंबर 2026 के अंत में भारत में 'ट्रक' शब्द की खोज में अचानक उछाल देखा गया। गूगल ट्रेंड्स के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को इस शब्द की खोज रुचि में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह ट्रेंड उत्तर प्रदेश में एक विशालकाय हाइड्रॉलिक ट्रांसपोर्टर के गुजरने की खबरों के कारण था, जो एक भारी औद्योगिक मशीन को लेकर लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रहा था।
यह ट्रक क्या है? – एक विशेष हाइड्रॉलिक ट्रांसपोर्टर
आम तौर पर जिसे लोग 'ट्रक' कह रहे हैं, वह वास्तव में एक विशेष मल्टी-एक्सल हाइड्रॉलिक ट्रांसपोर्टर है। यह कोई सामान्य वाणिज्यिक वाहन नहीं है, बल्कि भारी औद्योगिक उपकरणों को ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया एक इंजीनियरिंग चमत्कार है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके 308 पहिये हैं, जो 200 टन वजनी मशीन के भार को सड़क पर समान रूप से वितरित करते हैं ताकि सड़क को नुकसान न पहुंचे।
इस वाहन की गति अत्यंत धीमी है, जो लगभग 5 किमी/घंटा बताई गई है। इस पर लदी मशीन की ऊंचाई करीब 8 मीटर और चौड़ाई 7 मीटर है, जिससे यह एक 'ओवर डायमेंशन कारगो' बन जाता है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, चंदौली के कटशीला गांव के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर इसे देखने के लिए भारी भीड़ जमा हुई थी।
बेल्जियम से लखीमपुर खीरी तक का सफर
यह औद्योगिक बॉयलर/वेसल बेल्जियम में निर्मित हुआ और समुद्री मार्ग से भारत लाया गया। इसकी यात्रा का क्रम इस प्रकार रहा:
- प्रस्थान: बेल्जियम से समुद्री मार्ग द्वारा।
- प्रवेश: ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर उतारा गया।
- सड़क मार्ग: पारादीप से सड़क मार्ग द्वारा बिहार और फिर उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के नौबतपुर बॉर्डर में प्रवेश।
- गंतव्य: चंदौली और वाराणसी से होते हुए लखीमपुर खीरी।
जागरण के अनुसार, यह विशाल औद्योगिक बॉयलर बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी लखीमपुर इकाई के लिए लाया जा रहा है।
पर्यावरणीय महत्व: भारत का पहला बायोप्लास्टिक प्लांट
इस भारी मशीनरी का गंतव्य केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल है। यह मशीन कुंभी लखीमपुर में गन्ने से बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाने वाले प्लांट में लगाई जाएगी। यह देश का पहला ऐसा प्लांट होगा जो पर्यावरण-अनुकूल प्लास्टिक का उत्पादन करेगा, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, कुछ रिपोर्टों में इसे एथेनॉल प्लांट से जोड़ा गया है, लेकिन मुख्य उद्देश्य गन्ने पर आधारित बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का उत्पादन बताया गया है। लाइव हिन्दुस्तान ने उल्लेख किया है कि इस मशीन को बलरामपुर चीनी मिल के एथेनॉल प्लांट में लगाया जाना है।
लॉजिस्टिक चुनौतियां और प्रशासनिक व्यवस्था
मशीन के विशाल आकार (8 मीटर ऊंचाई और 7 मीटर चौड़ाई) के कारण इसे ले जाना एक बड़ी चुनौती थी। रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए:
- NHAI साइनेज: नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के बड़े बोर्डों और साइनेज को अस्थायी रूप से हटाया गया।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: कुछ जगहों पर बिजली के खंभों और प्रवेश द्वारों को हटाना पड़ा ताकि वेसल सुरक्षित निकल सके।
- सुरक्षा: नौबतपुर बॉर्डर और अन्य संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में तीन बड़ी क्रेनों का उपयोग करके प्रवेश द्वारों के बोर्डों को हटाया और फिर से लगाया गया ताकि यातायात और बुनियादी ढांचे को न्यूनतम नुकसान हो।
Sources & further reading
- चंदौली पहुंचा 308 पहियों का ट्रक, देखने उमड़ी लोगों की भारी भीड़ - Uttar Pradesh AajTak
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